पर्वत पाटिया में नोबल पब्लिक स्कूल के 16 छात्रों को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में ए-1 ग्रेड मिला
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50 छात्रों को भी ए-2 ग्रेड में मिला स्था
सूरत। गुजरात माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आज कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया, जिसमें सूरत के पर्वत पाटिया क्षेत्र स्थित नोबल पब्लिक स्कूल के छात्रों ने भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कर स्कूल का गौरव बढ़ाया है। स्कूल के 154 छात्रों में से 16 छात्रों को ए1 ग्रेड और 50 छात्रों को ए2 ग्रेड मिला है। टांक ऋषभ दिलीपभाई ने 99.87 पर्सेंटाइल और 95.50 प्रतिशत अंकों के साथ स्कूल में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि पलक लाखानी ने 99.72 पर्सेंटाइल और 94.50 प्रतिशत के साथ दूसरा और युदवीर सिंह सिसोदिया ने 99.65 पर्सेंटाइल और 94.17 प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है।
इसके अलावा ए-1 ग्रेड में शामिल छात्रों में चोवटिया सानिध्य महेशभाई (99.58 पर्सेंटाइल, 93.83 प्रतिशत), गांगानी हेत अरविंदभाई (99.50 पर्सेंटाइल और 93.50 प्रतिशत), राठौड़ ऋत्वी भरतभाई (99.41 पर्सेंटाइल और 93.17 प्रतिशत), दियोर मिराज भावेशभाई (99.36 पर्सेंटाइल और 93 प्रतिशत), पटेल वत्सल अशोककुमार (99.32 पर्सेंटाइल और 92.83 प्रतिशत), वेकरिया यशवी नरेंद्रभाई (99.32 पर्सेंटाइल और 92.83 प्रतिशत), आहीर नैना विनोदभाई (99.32 पर्सेंटाइल और 92.83 प्रतिशत), पटेल आर्यन अशोकभाई (99.21 पर्सेंटाइल और 92.50 प्रतिशत), पटेल धुमिल संजयकुमार (98.98 पर्सेंटाइल और 91.83 प्रतिशत) , सोंडागर बलराम प्रकाशभाई (98.86 पर्सेंटाइल और 91.50 प्रतिशत), गोहिल इशानी घनश्यामभाई (98.86 पर्सेंटाइल और 91.50 प्रतिशत), घड़िया रिया अल्पेशभाई (98.59 पर्सेंटाइल और 90.83 प्रतिशत) और पटेल देव बाबूभाई (90.46 पर्सेंटाइल और 90.67 प्रतिशत) शामिल हैं। विद्यालय परिवार की ओर से सभी विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए सभी विद्यार्थियों को बधाई दी गई।
सूरत (गुजरात) [भारत],14 जुलाई: शहर की अग्रणी शैक्षणिक संस्था आईआईएफडी (इंइंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ैशन डिज़ाइनिंग) द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी इंटीरियर डिज़ाइनिंग के विद्यार्थियों के लिए भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। ‘आरासा’ नामक इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी अद्भुत रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और डिज़ाइनिंग कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। आईआईएफडी सूरत […]
नई दिल्ली, सितम्बर 20: भारत में छात्र आत्महत्या के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। जितने भारत में टॉपर्स निकल रहे हैं, उससे 10 गुना ज्यादा बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। सिर्फ 10वीं-12वीं या कॉलेज के बच्चों के ही नहीं, बल्कि इससे भी ज्यादा कक्षा 4 से लेकर कक्षा 9 तक के बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। इसका जिम्मेदार कौन है? माता-पिता, स्कूल या खुद बच्चे? इसी विषय पर हमारी बातचीत BIYZEN Youth Services के डायरेक्टर श्री अमनदीप से हुई।अमनदीप ने इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से समझाया।उन्होंने बताया कि भारत आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, और इस बदलाव के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। हर इंसान को तनाव का सामना करना पड़ता है, चाहे वह 8 साल का बच्चा हो या 60 साल का वयस्क। पिछले दो दशकों में मानसिक सहनशीलता की कमी के कारण कई बदलाव हुए हैं, जिससे तनाव और आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। BIYZEN Youth Services हजारों बच्चों को आत्महत्या से बचा चुका है और उन्हें अपनी सेवाएं प्रदान कर चुका है। उनकी Stress Reliever Shield बच्चों को तनाव और आत्महत्या से बचाती है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन के मूल्यों को समझना आसान हो जाता है। अमनदीप ने बताया कि जब वह किसी माता-पिता से बात करते हैं, तो सभी यही कहते हैं कि “हमारे बच्चों को किसी प्रकार का तनाव नहीं है।” लेकिन जब उन्हें यह बताया जाता है कि जिन बच्चों ने आत्महत्या की, उनके माता पिता का भी यही जवाब था, तब उन्हें समझ आता है कि किसी की मानसिक स्थिति को बिना काउंसलिंग के समझा नहीं जा सकता, क्योंकि तनाव बताकर नहीं आता। स्कूलों में इस सेवा को देने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिलती हैं। अमनदीप ने बताया कि जब वह स्कूलों में जाकर अपनी सेवाएं बच्चों को देने की कोशिश करते हैं, तो कुछ स्कूल इसे मुफ्त में भी बच्चों तक नहीं पहुँचने देते। दुःख की बात तो यह है कि जिन स्कूलों के बच्चे आत्महत्या कर चुके होते हैं, वे भी माता-पिता को दोषी ठहराकर बच्चों तक यह सेवा नहीं पहुँचने देते। कुछ स्कूल इस सेवा का शुल्क बहुत अधिक बताकर मना कर देते हैं, तो कुछ यह कहकर मना करते हैं कि “हमारे बच्चों को इसकी जरूरत नहीं है, बाद में आना।” हालांकि, कई अच्छे स्कूल अपने बच्चों को यह सेवा देने के लिए खुद हमें बुलाते हैं और पूरा सहयोग करते हैं, क्योंकि उनके लिए बच्चों की ज़िंदगी सबसे ज़रूरी होती है। अमनदीप ने बताया कि कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक हर बच्चे को तनाव-राहत काउंसलिंग मिलनी चाहिए, ताकि बच्चों में सकारात्मकता लाई जा सके और जब भी नकारात्मकता या तनाव आए, उसे तुरंत दूर किया जा सके। सिर्फ स्कूल में काउंसलर उपलब्ध होना काफी नहीं है, 24×7 सपोर्ट भी जरूरी है। कई स्कूल और माता-पिता अब इसे समझ रहे हैं, और कई स्कूल व माता-पिता अपने बच्चों को खोने के बाद इसे समझ रहे हैं। BIYZEN Youth Services 105 रुपए प्रतिमाह से भी कम मेंयह सेवा दे रहा है, जिसमें बच्चों को 24×7 कवर मिलता है, जो कि एक मोबाइल रिचार्ज से भी कम कीमत में देतेहै। जो ऑनलाइन जाकर स्वयंकोई भी ले सकते है www.biyzen.com से BIYZEN YOUTH SERVICES ने 30 हजार लोगों तक पहुँचाई स्ट्रेस रिलीवर सपोर्ट सैकड़ों बच्चो को आत्महत्या से बचाया BIYZEN Youth Services Pvt Ltd. ने 30 हजार से अधिक बच्चों और युवाओं तक अपनी स्ट्रेस रिलीवर सपोर्ट सेवा पहुंचाई है।स्कूल और इन्सटिट्यूट को जोड़ा इस सेवा के अंतर्गत अनुभवी काउंसलर्स द्वारा बच्चों की काउंसलिंग दी गई, जिससे उन्हें तनाव मुक्त जीवन जीने में मदद मिली है। इन सेवाओं के माध्यम से BIYZEN ने कई बच्चों को आत्महत्या जैसी गंभीर स्थितियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आवेदन कैसे करें? BIYZEN की सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बहुत ही सरल प्रक्रिया है। कोई भी छात्र, माता-पिता या स्कूल निम्नलिखित तरीकों से आवेदन कर सकते हैं: – BIYZEN की वेबसाइट पर जाएं: [www.biyzen.com](http://www.biyzen.com) – ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें: वेबसाइट पर उपलब्ध नामांकन और स्कूल भागीदारी फॉर्म के माध्यम से। – कार्ड सेवा के लिए आवेदन करें: ‘Student Stress Reliever Shield’ कार्ड प्राप्त करने के लिए वेबसाइट पर फॉर्म भरें या नजदीकी BIYZEN सेंटर से संपर्क करें। BIYZEN का लक्ष्य है कि हर बच्चा तनाव मुक्त और खुशहाल जीवन जिए। अब तक की सफलता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और आने वाले वर्षों में इस सेवा को और भी अधिक <p>The post बच्चो की आत्महत्या […]
भारत में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलना हमेशा से ही बेहद कठिन रहा है । सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जहां फ़ीस कम है वहाँ पर एडमिशन लेने के लिए आपको नीट की परीक्षा में टॉप 1% में रहना होगा । यह बेहद कठिन माना जाता है । बता दें कि नीट की परीक्षा में प्रतिवर्ष […]