A new range of fragrances, know the special products of Nayra
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दिल्ली, 06 दिसंबर: कौशांबी- इंटरनेशनल साईं सेवा ट्रस्ट द्वारा अयोजित दो दिवसीय महिला एवं बाल सशक्तिकरण कार्यक्रम की शुरुआत आज से होगी, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक बृजेश श्रीवास्तव, एवं मुख्य विकास अधिकारी अजीत कुमार श्रीवास्तव उपस्थित होंगे। श्री साईं मंदिर, को भव्य तरह से गेंदे के पुष्पों से सजाया गया […]
नई दिल्ली [भारत], 12 नवंबर: आईएएस अधिकारी और प्रेरक वक्ता सोनल गोयल की पुस्तक ‘नेशन कॉलिंग: होलिस्टिक अप्रोच टू यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन’ ने लंदन के वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय में भव्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा। पुस्तक विमोचन समारोह में वेस्टमिंस्टर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीटर बोनफील्ड, प्रो. कॉलिन कॉल्सन-थॉमस (प्रबंधन सेवा संस्थान के […]
हैदराबाद (तेलंगाना), मार्च 18: जब माननीय प्रधानमंत्री ने #SheInspiresUs पहल की शुरुआत की, तो इसका उद्देश्य केवल पदों पर आसीन महिलाओं को सम्मानित करना नहीं था। यह उन महिलाओं को पहचान देने की एक पहल थी जो परिवर्तन की चिंगारी जगाती हैं। ऐसी महिलाएँ जिनका काम विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि संरचनात्मक बदलाव की दिशा में एक दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। तेलंगाना में इस विचारधारा का एक सशक्त उदाहरण हरी चंदना के कार्यों में दिखाई देता है। पहली नजर में उनके सार्वजनिक कार्यों से जुड़े तीन पहल अलग-अलग दिखाई देते हैं — एक 10K रन, जो सार्वजनिक भागीदारी और जागरूकता को बढ़ावा देता है; एक मासिक धर्म गरिमा आंदोलन, जो किशोरियों के स्वास्थ्य और सम्मान पर केंद्रित है; और यूथ पार्लियामेंट, जो विद्यार्थियों में नागरिक भागीदारी और लोकतांत्रिक समझ विकसित करने का मंच प्रदान करता है। लेकिन यदि इन पहलों को गहराई से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि ये अलग-अलग कार्यक्रम नहीं हैं। वास्तव में ये एक सुविचारित और जुड़े हुए परिवर्तन की निरंतर प्रक्रिया के हिस्से हैं। यह संयोग नहीं है। यह एक सोच-समझकर बनाई गई संरचना है। यूथ पार्लियामेंट 2025 — उपस्थिति से आवाज़ तक हैदराबाद में आयोजित iVision Youth Parliament 2025 के ग्रैंड फिनाले का माहौल आत्मविश्वास और स्पष्टता से भरा हुआ था। युवा छात्र मंच पर खड़े होकर नीति, शासन और लोकतंत्र जैसे विषयों पर बहस कर रहे थे। इनमें कई छात्राएँ भी थीं, जो राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रख रही थीं। कई पर्यवेक्षकों के लिए यह दृश्य प्रतीकात्मक था। कुछ दशक पहले तक कई क्षेत्रों में किशोरियों के लिए स्कूल में बने रहना ही एक चुनौती हुआ करता था। सामाजिक और जैविक कारणों के कारण उनकी शिक्षा अक्सर बाधित हो जाती थी। मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चाएँ अक्सर चुप्पी में दबा दी जाती थीं, और सार्वजनिक विमर्श में उनकी भागीदारी सीमित रहती थी। आज वही पीढ़ी केवल शिक्षा जारी नहीं रख रही है, बल्कि संविधानिक मूल्यों और सार्वजनिक नीतियों पर खुलकर चर्चा भी कर रही है। यहाँ एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है — क्या यह मात्र संयोग है? या फिर यह एक सुव्यवस्थित और पोषित पारिस्थितिकी तंत्र का परिणाम है? जब लड़कियों को 10K रन जैसे अभियानों के माध्यम से सार्वजनिक रूप से प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनकी भागीदारी और दृश्यता सामान्य बनती है… जब मासिक धर्म गरिमा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि किशोरियों की पढ़ाई बाधित